Thursday, April 23, 2020

बचपन की यादें

नमस्कार दोस्तों,
मैं ब्लॉग लिखने में नया हूँ और पहली बार इस ब्लॉग की दुनिया में आया हूँ इसलिए आज करीब १० दिनों के बाद यह दूसरा ब्लॉग लिख रहा हूँ।

हालाँकि मैं एक कम बोलने वाला इंसान हूँ परन्तु जब बोलना शुरू करता हूँ तो रुकने में ज्यादा वक्त लग जाता है।

मैं आपको बताऊँ की मैं अपने माताजी, पिताजी ( जिनका देहांत अभी २३ फरवरी २०२० को हुआ है ), भाई अरुण ( जो मेरे से चार साल बड़ा है ) बहन उमा ( जो मेरे से दो साल छोटी थी - वह अब इस दुनिया में नहीं रहीं ) और मेरी दादी जी ( जिनका भी स्वर्गवास करीब ३५ से ३८ साल पहले हो गया है ) के साथ कोलकत्ता में रहता था।
मेरे माताजी और पिताजी की शादी की तस्वीर 
मैं और मेरी माताजी 

मैं - बहन - भाई 

मैं आज आपको उन बातों को बताऊंगा जिनके बारे में या तो मैंने मेरे माता पिता और परिवार जनों से सुना हुआ है या जो कुछ भी मुझे याद है.

सब कहते हैं कि मैं बहपन में काफी शर्मीला और माँ का चिप्पू बच्चा था।  मैं  किसी के पास भी नहीं जाता था।  कोई भी नया इंसान घर में आ जाता था तो या तो मैं माँ की गोद में बैठ जाता था या अपने आप को  किसी रूम में या बाथरूम में बंद कर लेता था।
कहते हैं की एक बार पिताजी की तबियत कुछ ख़राब हो गई और मुझे डॉक्टर को फ़ोन करने को कहा गया तो मैंने फ़ोन तो नहीं मिलाया और यह कह दिया की फ़ोन व्यस्त है मिल ही नहीं रहा और मेरे बड़े भाई ने फ़ोन मिला कर डॉक्टर को बुलाया था.

मेरे ननिहाल (जो पिलानी राजस्थान में है और मेरा जनम भी पिलानी में ही हुआ है ) में  एक   आदमी  रहता  था   ( ओंकार नाम था उसका ) जो घर के सभी काम करता था और वह मेरा विशेष ख्याल रखता था - मैं जब भी नानाजी के पास जाता तो मैं  उसको ही चिपके रहता था।

मैं बचपन से ही कुछ अलग किस्म की हरकतें करता था - कहते हैं की उस समय जो इलेक्ट्रिक वायरिंग होती थी वो LEAD  मेटल से कवर होती थी और उनको  दीवार पर लकड़ी की पट्टी के ऊपर कुछ क्लिप जैसी होती थी उससे अटकाया जाता था - तो मैंने करीब ५ साल की उम्र मैं ही एक बड़े हिस्से की क्लिप खोल कर माँ को दे दी थी. - बड़ी मार पड़ी थी -

मुझे याद है जब मैंने NINTH STANDERTED ( नवमी क्लास ) को पास किया था और फिर जब मैं बॉम्बे आया था मेरे मामा  के पास तब मुझे पहली बार  कारपेंटर के टूल्स मिले थेऔर मैं हमेशा अपने रूम को गन्दा रखता था।  मुझे रेडिओ खोलने और उसके कोर को एडजस्ट करकर उसपर मोम (WAX )डालकर जाम करने में बड़ा मजा आता था
मैं जब स्कूल से निकला था या ११वी क्लास में था उस समय की तस्वीर 
पुरे स्कूल लाइफ में मैंने बड़े मजे किये ,

मैंने ९वी तक की पढाई दौलत राम नौपानी विद्यालय से की थी।  उस समय हम लोग एमहर्स्ट स्ट्रीट में रहते थे बाद में  हम लोग रास बिहारी स्ट्रीट में रहने आ गए और इसलिए मेरी स्कूल भी बदल गई और मैं आदर्श हिंदी हाई स्कूल में  भर्ती हो गया

यहाँ से मेरी जिंदगी में कुछ कुछ बदलाव आने चालू हो गए थे।  हम लोग पढाई में तो ठीक ठीक थे पर अब थोड़ी थोड़ी चंचलता आने लग गई थी.

मेरे कुछ दोस्त जो मझे आज भी याद हैं - और FACEBOOK के जरिये उनसे फिर से कांटेक्ट हो गया है..  फ़ोन पर कभी कभी बात भी होती है - मेरे दोस्त कमल सिन्हा, नित्यानद शर्मा , सूरबीर सिंह - आदि आदि

चलो दोस्तों आज बस इतना ही - रात के २.३० होने चले है और हमारी घरवाली कह रही है की अब तो सो जाओ. तो दोस्तों शुभ रात्रि - फिर जल्दी ही मिलेंगे।

आपका सुबोध

जय हिन्द


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